भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद
केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान

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सी एम एफ आर आइ में मात्स्यिकी एवं जलजीव पालन पर अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला की शुरुआत

सी एम एफ आर आइ में मात्स्यिकी एवं जलजीव पालन पर अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला की शुरुआत


ए ए आर डी ओ के 12 आफ्रो – एशियन सदस्य देशों के प्रतिनिधि कार्यशाला में भाग ले रहे हैं.

 

 

     केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सी एम एफ आर आइ) में दिनांक 15 जनवरी  2019 को अफ्रीकन एशियन ग्रामीण विकास संगठन (ए ए आर डी ओ) के 12 सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के लिए मात्स्यिकी एवं जलजीव पालन पर अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गयी. ओमान, लेबनान, थायवान, मोरोक्को, सिरिया, टुनीशिया, लिबिया, ज़ाम्बिया, मलावी, मौरीशस,

श्रीलंका एवं बंगलादेश के 14 प्रतिनिधि 15 दिवसीय कार्यशाला में भाग ले रहे हैं.

 

     श्री के. एस. श्रीनिवास, आइ ए एस, अध्यक्ष समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एम पी ई डी ए) ने कार्यशाला का उद्घाटन किया. इस अवसर पर, डॉ. मनोज नरदेव सिंह, आरडो के सहायक  महासचिव ने कहा कि कृषि क्षेत्र को 2050 तक वैश्विक स्तर पर 60% ज़्यादा खाद्य का उत्पादन करना होगा और विकसित देशों को अपने सीमित उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के द्वारा 100% ज़्यादा उत्पादन करना होगा.  

      उन्होंने कहा कि खाद्य एवं पौष्टिक सुरक्षा की बढ़ती मांग से सामना करने हेतु  आफ्रो- एशियन क्षेत्र के विकसित देशों को व्यापक नीतियां बनानी होंगी एवं मात्स्यिकी क्षेत्र में पर्याप्त प्रौद्योगिकियां विकसित करनी होंगी.

     डॉ. टी. वी. सत्यानंदन कार्यक्रम में अध्यक्ष रहे. डॉ. इमेल्डा जोसफ और डॉ. बॉबी इग्नेशियस ने इस अवसर पर व्याख्यान दिए.

     प्रशिक्षणार्थियों को व्यावहारिक सत्र के साथ समुद्री मात्स्यिकी निर्धारण, मछली प्रभव आकलन, समुद्री मात्स्यिकी पर्यावरण, मात्स्यिकी पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव, उत्तरदायित्वपूर्ण मात्स्यिकी एवं समुद्री संवर्धन गतिविधियाँ जैसे कि पिंजरा मछली पालन पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया जाएगा. उनको वास्तविक रूप से आंकड़ा संग्रहण में अनुभव प्राप्त करने हेतु पोताश्रयों में दौरा करने का अवसर प्रदान किया जाएगा.

      अफ्रीकन एशियन ग्रामीण विकास संगठन (आरडो) कृषि एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र का एक अंतर- सरकारी संगठन है और इसका मुख्यालय नई दिल्ली है. आरडो में अब अफ्रीका एवं एशिया के  33 सदस्य देश शामिल है.

दोगुनी आय : भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ इ कृषकों के लिए ‘फार्म शोप्पी’ की शुरुआत

दोगुनी आय : भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ इ कृषकों के लिए ‘फार्म शोप्पी’ की शुरुआत

   भा कृ अनु प – केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सी एम एफ आर आइ), कोच्ची के कृषि विज्ञान केंद्र एवं संस्थान के कृषि प्रौद्योगिकी सूचना केंद्र – ए टी आइ सी ने संयुक्त रूप से भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ मुख्यालय में जनवरी 2019 को ‘फार्म शोप्पी -  सुरक्षित खाद्य भण्डार’ की शुरुआत की. इस आउटलेट में कृषक, कृषक समूह एवं स्वयं सहायता संघ से सीधे प्राप्त ताज़ा, स्वच्छ एवं शुद्ध खाद्य पदार्थ उपलब्ध होंगे.

   वर्ष 2022 तक कृषकों की आय दोगुनी करने के भारत सरकार के कार्यक्रम के अंतर्गत कृषकों के विपणन अवसर के रूप में शुरू हुई यह पहल, बिचौलियों को हटाकर उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य प्रदान करते हुए कृषकों को उचित मूल्य सुनिश्चित करती है. दैनिक आधार पर उपयोग किये जाने वाले मछली, अंडा, दूध, तेल, दाल, मसाला आदि विक्रय के लिए इस आउटलेट में उपलब्ध है. यह फार्म शोप्पी के वी के की  आवर्ती निधि का उपयोग करके चलाया जाता है.

    स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत इस आउटलेट से बेचने वाले खाद्य पदार्थ शुद्ध जैविक है और प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने के लिए प्लास्टिक डिब्बों को एकत्रित किया जाता है. जैविक कृषि पालन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने हेतु यह आउटलेट एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि इस फार्म शोप्पी के ज़रिए जैव कृषक अपने उत्पादों का विपणन ढूँढने में सक्षम होंगे. 

    भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ के निदेशक डॉ. ए. गोपालकृष्णन ने शोप्पी का उद्घाटन किया.

भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ में 72 वां स्थापना दिवस मनाया गया

भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ में 72 वां स्थापना दिवस मनाया गया

 

      भा कृ अनु प – केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सी एम एफ आर आइ ) कोच्ची के मुख्यालय एवं क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्रों ने दिनांक 5 फरवरी 2019 को आयोजित 72- वें स्थापना दिवस समारोह में  विद्यार्थी एवं जनता के लिए अपने द्वार खोल दिया. इस ओपन हाउस कार्यक्रम ने जनता में समुद्र की अद्भुत दुनिया को निकट से पहचानने एवं समुद्री अनुसंधान के नवीनतम विकास को सीखने की रूचि जगायी.  कोच्ची में स्थित मुख्यालय में जलीय जीव जंतुओं की विस्मयी दुनिया को देखने एवं वैज्ञानिकों से विचार - विमर्श करने के लिए करीब 5000 लोगों ने  मुआइना किया.   

 

       समुद्री दुनिया को देखने आया जनसमूह सी एम एफ आर आइ के राष्ट्रीय जैवविविधता संग्रहालय में रखी 35 कि. ग्रा. वज़न से युक्त भीमाकाय नेपोलियन व्रास्से को देखकर चकित रह गए. संग्रहालय में विविध समुद्री प्रजातियों के संग्रह जैसे कि समुद्री खरगोश, उड़न स्क्विड, अश्वनाल कर्कट,समुद्री सांप, समुद्री पक्षी, पर्ल शुक्ति, समुद्री पशु, सुराएं, पेंग्विन, डॉलफिन आदि प्रदर्शित हैं. सी एम एफ आर आइ संग्रहालय समुद्री प्रजातियों के लिए राष्ट्रीय नामित रजिस्ट्री है जिसमें करीब 3000 समुद्री नमूनों का संग्रह है.

 

    इस अवसर पर सी एम एफ आर आइ में वेलापवर्ती, तलमज्जी, मोलस्कन एवं क्रस्टेशियन मात्स्यिकी संपदाएं जैसे कि डॉलफिन फिश, सुराओं एवं रे की अपूर्व प्रजातियां, भीमाकार पुली झींगा एवं भीमाकार केंकडों का प्रदर्शन था. अपूर्व अलंकारी प्रजातियों को प्रदर्शित समुद्री अनुसंधान जलजीवशाला, सीपियां, पर्ल शुक्तियां, स्क्विड जिग्स, मैन्ग्रोव के विविध प्रकार, समुद्री शैवालों ने आगंतुकों को आकर्षित किया.

 

     आगंतुकों ने सी एम एफ आर आइ की  मछली आयु निर्धारण प्रयोगशाला की कार्यप्रणाली को समझने में रूचि दिखायी. इस प्रयोगशाला में मछलियों की आयु निर्धारित करने के लिए विविध उपकरणों का प्रयोग किया जाता है और वैज्ञानिकों ने इस प्रक्रिया में निहित विविध चरणों की व्याख्या दी. जनता के लिए समुद्री पिंजरा मछली पालन के नमूने, एक्वापोनिक्स, अलंकारी मछली पालन, पुनःपरिसंचरण जलजीवपालन प्रणाली आदि का प्रदर्शन किया गया. आगंतुकों ने राज्य की समुद्री मात्स्यिकी द्वारा  सामना किये जाने वाले मुद्दों एवं चुनौतियों के बारे में वैज्ञानिकों से  विचार विमर्श किया. आणविक जैविकी, जैव पूर्वेक्षण, कोशिका संवर्धन, मात्स्यिकी जैविकी, पर्यावरणीय अनुसंधान, जलवायु परिवर्तन, सागरीय अम्लीकरण आदि से सम्बंधित प्रयोगशालाएं भी खुली थीं. जलीय पारितंत्र में प्लास्टिक कचरों को फेंकने से उत्पन्न विपत्तियों के बारे में जागरूकता जगायी. सी एम एफ आर आइ के 10 प्रभागों के प्रदर्शन स्टोलों में सूचना सेवाएं प्रदान की गयीं. छात्रों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से अवगत कराने हेतु सी एम एफ आर आइ द्वारा स्थापित “जलवायु क्लब” नामक नए मंच में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया गया. स्थापना दिवस के दौरान आर्द्र भूमि के परिरक्षण से संबंधित व्याख्यान भी आयोजित किया गया. 

      

समान रूप से ओपन हाउस कार्यक्रम का आयोजन करते हुए वेरावल, मुंबई, कारवार, मांगलूर, कालिकट, विषिंजम, चेन्नई, टूटिकोरिन, मंडपम, विशाखपट्टणम, दिघा, पुरी क्षेत्र केंद्र एवं एरणाकुलम में स्थित भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ के के वि के में जनता को  संस्थान की  अनुसंधान गतिविधियों को देखने एवं पहचानने हेतु स्थापना दिवस मनाया गया. संस्थान के क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्रों में प्रदर्शन के अतिरिक्त जागरूकता व्याख्यान, आपसी चर्चा, फ़िल्म प्रदर्शन एवं विविध प्रतियोगिताएं आयोजित की गयीं. 

 

 

मद्रास अनुसंधान केंद्र

 

     संस्थान के मद्रास अनुसंधान केंद्र के स्थापना दिवस समारोह का उद्घाटन डॉ. ए. आर. टी. अरसु, प्रभागाध्यक्ष (सेवानिवृत्त), सी आइ बी ए द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से किया गया. सी एम एफ आर आइ के साथ अपने सहयोग को  याद करते हुए, डॉ. अरसु ने अनुसंधान केंद्र द्वारा किये गए कार्यकलापों की सराहना की और संस्थान के नाम को और ऊंचाई तक पहुंचाने के लिए कार्मिकों को प्रेरित किया गया.  डॉ. पी. लक्ष्मीलता, प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रभारी वैज्ञानिक ने स्वागत भाषण दिया. समारोह के दौरान आयोजित ओपन हाउस में सान्तोम हाई स्कूल(50), केन्द्रीय विद्यालय, सी एल आर आइ कैम्पस (63) और प्रसिड़ेंसी कालेज (56)  से 113 छात्रों ने केंद्र का मुआइना किया. सी एम एफ आर आइ पर वीडियो चित्र के प्रदर्शन के बाद वैज्ञानिकों के साथ विचार विमर्श भी आयोजित किया गया. छात्रों ने समुद्री जलजीवशाला, समुद्री जैवविविधता संग्रहालय, मात्स्यिकी जैविकी प्रयोगशाला, जलराशि प्रयोगशाला एवं ऊतक संवर्धन प्रयोगशाला का मुआइना किया. अंत में, केंद्र में किये गए मुआइने के आधार पर छात्रों के लिए प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया और विजेताओं को पुरस्कार भी प्रदान किए गए.   

 

टूटिकोरिन अनुसंधान केंद्र

 

  डॉ. पी. वेलायुधन, अध्यक्ष, मात्स्यिकी कॉलेज एवं अनुसंधान संस्थान, तमिलनाडु डॉ. जे. जयललिता मात्स्यिकी विश्वविद्यालय, टूटिकोरिन ने टूटिकोरिन अनुसंधान केंद्र, टूटिकोरिन के स्थापना दिवस समारोह का उद्घाटन किया. इस समारोह में डॉ. एन. चंद्रा, मात्स्यिकी संयुक्त निदेशक (क्षेत्रीय), टूटिकोरिन, श्रीमती अंजु, सहायक निदेशक, एम पी ई डी ए, टूटिकोरिन और श्री. शिवा रामकृष्णन, मात्स्यिकी सहायक निदेशक (मत्स्यन पोताश्रय), टूटिकोरिन भी उपस्थित थे. डॉ. पी. पी. मनोजकुमार, प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रभारी वैज्ञानिक ने सभा का स्वागत किया. विविध कॉलेजों एवं स्कूलों के अनुसंधानकारों एवं छात्रों ने केंद्र का मुआइना किया. छात्र एवं सामान्य जनता सहित कुल आगंतुकों की संख्या 2400 से ज़्यादा थी. समारोह के दौरान “ समुद्री जीवन पर प्लास्टिक प्रदूषण का प्रभाव” पर भाषण प्रतियोगिता और “समुद्री पर्यावरण में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव” विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता भी आयोजित की गयीं.    

 

 

भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ का पुरी क्षेत्र केंद्र 

     स्थापना दिवस समारोह के दौरान, पुरी अनुसंधान केंद्र में छात्रों, सामान्य जनता एवं मछुआरे समुदाय के लिए संस्थान के अनुसंधान एवं विकास की गतिविधियों की झलक देखने का अपूर्व अवसर प्राप्त हुआ. पख मछली एवं कवच मछली सहित विविध समुदी प्रजातियाँ, जीवित नमूने, मोनोग्राफ, पुस्तकें, न्यूसलेटर, पुस्तिकाएं, संस्थान के डोक्युमेंटरी वीडियो, विकसित उत्पादों एवं अन्य प्रकाशनों का प्रदर्शन किया.   


समुद्री संवर्धन एवं समुद्री पिंजरा मछली पर प्रशिक्षण

समुद्री संवर्धन एवं समुद्री पिंजरा मछली पर प्रशिक्षण

            भा कृ अनु प केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान के टूटिकोरिन अनुसंधान केंद्र और मान्नार घाटी जीवमंडल ट्रस्ट (जी ओ एम बी आर टी) के वन विभाग,  टूटिकोरिन के संयुक्त तत्वाधान में दिनांक 8 से 10 जनवरी तक, 2019 को टूटिकोरिन जिले के तरुवैकुलम गाँव में खुला सागर पिंजरी मछली पालन एवं समुद्री संवर्धन पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया.

यह कार्यक्रम टूटिकोरिन जिले के चयनित GOMBRT तटीय गांववालों को वाणिज्यिक एवं आर्थिक प्रधान मछलियों एवं कवच मछलियों के पिंजरा मछली पालन पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिए गए. इस कार्यक्रम के दौरान समुद्री संवर्धन एवं पिंजरा मछली पालन के विविध आयामों जैसे कि साईट चयन, समुद्री पिंजरों का डिसाइन, पिंजरों का निर्माण एवं विस्थापन, समुद्री पिंजरा मछली पालन, एकीकृत बहु – पौष्टिक जलजीव पालन (आइ एम टी ए) पालन तरीके, समुद्री शैवाल संवर्धन, मोती संवर्धन, शीर्षपादों का डिम्भक पालन, एवं कम मूल्य मछली खाद्य निर्माण पर प्रशिक्षण दिए गए.  

डॉ. पी. पी. मनोजकुमार, प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रभारी वैज्ञानिक, सी एम एफ आर आर आइ टूटिकोरिन अनुसंधान केंद्र ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया. उन्होंने कहा कि एफ आइ एम एस यु एल, एन ए डी पी और एन एफ डी बी परियोजना के अंतर्गत सी एम एफ आर आइ ने तटीय मछुआरों को पिंजरा मछली पालन तरीकों के लिए साइट चयन, कम मूल्य पिंजरा डिसाइन, पिंजरों का निर्माण,विस्थापन एवं समुद्री बास, कोबिया, चिंगट आदि के समुद्री पिंजरों में पालन हेतु वैज्ञानिक एवं तकनीकी सलाह दिए गए.  उन्होंने आइ एम टी ए के अंतर्गत मछली संतति संपदाओं, समुद्री मछली पालन गतिविधियों, समुद्री शैवाल संवर्धन, मोती संवर्धन पर मछुआरों को ज्ञान दिलाने हेतु प्रशिक्षण मैनुअल (तमिल में) का विमोचन किया. श्री. रघुवरन राजेश, वन रेंज अधिकारी एवं जी ओ एम बी आर टी प्रभारी क्षेत्रीय ने सभा का स्वागत किया.

डॉ. पी. पी. मनोजुमार, डॉ. आइ. जगदीश, प्रधान वैज्ञानिक, डॉ. एल. रंजित, वैज्ञानिक, श्री सी. कालिदास, वैज्ञानिक एवं डी. लिंग प्रभु, वैज्ञानिक ने कार्यक्रम के दौरान विविध तकनीकी सत्र का संचालन किया. सिप्पीकुलम और कीलविपर के मोडल समुद्री पिंजरा मछली फार्म के अध्ययन दौरा के साथ समुद्री पिंजरा मछली पालन के लिए साइट चयन, जी आइ पिंजरों का निर्माण, समुद्री बास, लोबस्टर, केंकड़ा, पर्ल शुक्तियाँ एवं समुद्री शैवाल के पिंजरा संवर्धन के प्रदर्शन भी दिखाया गया. डॉ. एन. चंद्रा, संयुक्त निदेशक (क्षेत्रीय), तमिल नाडु राज्य मात्स्यिकी विभाग, टूटिकोरिन ने प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र दिया गया.

भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ द्वारा पिंजरा मछली पालन के ज़रिए युवकों को उद्यमियां बनाने हेतु प्रशिक्षण

भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ द्वारा पिंजरा मछली पालन के ज़रिए युवकों को उद्यमियां बनाने हेतु प्रशिक्षण


कडमक्कुडी पंचायत के सैकडों परिवारों के लिए लाभदायक प्रयास के रूप में भा कृ अनु प – केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सी एम एफ आर आइ) ने पिंजरा मछली पालन के ज़रिए पंचायत के युवकों को लघु पैमाने के उद्यामी बनने हेतु दिनांक 23 से 25 फरवरी 2019 तक तीन दिवसीय कौशल विकास कार्यक्रम का आयोजन किया.

कोरमपाडम सेवा सहकारी बैंक, कोताड के संयुक्त तत्वाधान में, भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ ने पिंजरा मछली पालन के विविध चरणों जैसे कि पिंजरों की स्थापना, साइट की पहचान, प्रजातियों का चयन, खाद्य प्रबंधन, संग्रहण एवं विपणन पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया. 114 से ज़्यादा ग्रामवासियों ने प्रशिक्षण में भाग लिया जिसमें पिंजरा मछली पालन साइट का मुआइना एवं व्यावहारिक पाठ निहित थे. यह सहयोगी कार्यक्रम भा कृ अनु प - सी एम एफ आर आइ के पिछले वर्ष के चालू परियोजना से जुड़ा हुआ है जो  राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड  (एन एफ डी बी) की वित्तीय सहायता से पिंजरा मछली पालन द्वारा राज्य भर के 5000 मछुआरों को प्रशिक्षित करना लक्ष्य कर रहा है.

पंचायत के पश्च जल में पिंजरा मछली पालन को प्रोत्साहन करने हेतु गाँववालों को भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आर आइ द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन एवं बैंक पिंजरा मछली पालन आरम्भ करने के लिए प्रारम्भिक पूंजी प्रदान करेंगे. सी एम एफ आर आइ मछली पालनकारों को पिंजरा मछली पालन के प्रत्येक चरण में तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करेंगे ताकि वे उस क्षेत्र में उद्यमी बन सके. पिंजरा मछली पालन मछुआरों के लिए एक अतिरिक्त श्रोत की तरह कार्य करेंगे और घरेलू मछली उत्पादन बढाने में सहायता करेंगी. पिंजरा मछली पालन के लिए कोबिया, समुद्री बास, स्नापर, मुल्लेट एवं पर्ल स्पोट जैसी प्रजातियों का उपयोग किया जाएगा.

भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ ने अब तक राज्य भर के 2500 मछुआरों को प्रशिक्षित किया है और सी एम एफ आर आइ के तकनीकी मार्गदर्शन के अधीन करीब 2500 पिंजरा मछली पालन यूनिट तटीय राज्यों में चालू है.

स्फुटनशाला में पालित शीर्षपाद किशोरों का समुद्री रैंचन

स्फुटनशाला में पालित शीर्षपाद किशोरों का समुद्री रैंचन


भारत में प्रतिदिन शीर्षपाद मात्स्यिकी विकसित हो रही है क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय निर्यात बाज़ार में शीर्षपाद संपदाओं जैसे कि स्क्विड एवं कटल फिश की बढ़ती मांग हो रही है. इस समय मौजूदा मात्स्यिकी में पूरक के रूप में नियमित समुद्री रैंचन के दवारा शीर्षपाद प्रभवों की पुनःपूर्ति में सहायक सिद्ध होंगे. शीर्षपाद मात्स्यिकी की निगरानी और इससे जुड़े हुए मछुआरों की राय लेने पर वैज्ञानिकों ने बताया कि आकस्मिक रूप से अंडों का समुच्चय मत्स्यन जाल में फंस जाता है और तट पर पहुंचकर अंड समुच्चय के नाश का कारण बन जाता है. अतः मछुआरों से जीवनक्षम अंडों को एकत्रित करके वायु (गैस) से भरे कंटेनर में सी एम एफ आर आइ के टूटिकोरिन अनुसंधान केंद्र के कवच मछली स्फुटनशाला में भेज दिया जाता है और अंड समुच्चय से किशोरों का पलन करके उचित मत्स्यन परिस्थिति में समुद्री रैन्चन किए जाने का प्रयास किया गया.  

    अंड समुच्चय को एकत्रित करके स्फुटनशाला में वायु भरे एफ आर पी टैंकों में प्रजातिवार अनुरक्षण किया जाता है और इन अंडों के स्फुटन का ध्यानपूर्वक निरीक्षण किया जाता है. स्फुटनशाला में सेपियोट्यूथिस लेस्सोनियाना एवं सेपिया फ़राओनिस के स्फुटन का निरीक्षण किया गया. नई स्फुटित किशोरों को एकत्रित करके पालन टैंकों में संभरित किया जाता है और किशोर शीर्षपादों को जीवित खाद्य जैसे कि माइसिड, यथेष्ट खिलाया जाता है. स्फुटित सेपियोट्यूथिस लेस्सोनियाना एवं सेपिया फ़राओनिस को क्रमशः 30 एवं 40 दिनों तक पालन किया जाता है. स्फुटनशाला में पालन किए गए किशोरों को उचित मत्स्यन क्षेत्र में विमोचन हेतु 10 लिटर वायु भरे गए पोलितीन बैगों में मछुआरों को सौंपा दिया जाता है. वर्ष 2015 से टूटिकोरिन में यह कार्यक्रम जारी किया जा रहा है. 

पाक खाडी में हरित पुली चिंगट का समुद्री रैंचन

पाक खाडी में हरित पुली चिंगट का समुद्री रैंचन


चिंगट प्रभव की पुनःपूर्ति और उसे बढावा देने हेतु समुद्री रैंचन कार्यक्रम को जारी करते हुए और स्थानीय मत्स्यन समुदायों की आजीविका में सहयोग देने के लिए भा कृ अनु प – केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सी एम एफ आर आइ) के मंडपम क्षेत्रीय केंद्र ने पाक खाडी में दिनांक 29 मार्च 2019 को ‘तालै इरल’ नामक स्थानीय नाम से जाने वाले हरित पुली चिंगट (पी. सेमिसल्केटस) के संततियों का विमोचन किया. डॉ. आर. जयकुमार, प्रभारी वैज्ञानिक, डॉ. ए. के. अब्दुल नाज़र, प्रधान वैज्ञानिक, भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ मद्रास अनुसंधान केंद्र, श्री जे. एल. अजित स्टालिन, मात्स्यिकी सहायक निदेशक, राज्य मात्स्यिकी विभाग,  मंडपम के कार्मिक गण, भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ मंडपम क्षेत्रीय केंद्र के वैज्ञानिक एवं कर्मचारी गण, मछुआरा संगठन के नेताओं एवं मछुआरों की उपस्थिति में चिंगट संततियों का विमोचन किया गया. केंद्र के वैज्ञानिक, श्री एम. शंकर एवं डॉ. बी. जोणसन द्वारा समुद्री रैंचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया.  

 


 एम एस सी प्रमाणीकरण 

    पाक की खाडी एवं मन्नार की खाड़ी के हरित पुली चिंगट को मराइन स्टिवार्डशिप काउन्सिल (एम एस सी) के प्रमाणीकरण के लिए पहचाना गया है. प्रमाणीकरण पाने के लिए इन प्रजातियों की मात्स्यिकी सुधार परियोजना प्रक्रियाधीन है. 

समुद्री रैंचन के प्रभाव पर आनुवंशिक अध्ययन 

    पोलिमोर्फिक माइक्रो साटलाईट मोलिकुलार मारकर के ज़रिए चिंगट अवतरण पर समुद्री रैंचन के प्रभाव को मूल्यांकन करने के लिए भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ द्वारा हरित पुली चिंगट (पीनियस सेमिसल्केटस) पर आनुवंशिक प्रभव पहचान (जी एस आइ) किया जा रहा है. अवतरण से प्राप्त नमूनों को आनुवंशिक विश्लेषण के लिए एकत्रित किया जाता है.

टूटिकोरिन अनुसंधान केंद्र में खुला समुद्र पिंजरा मछली पालन पर कौशल विकास कार्यक्रम का आयोजन

टूटिकोरिन अनुसंधान केंद्र में खुला समुद्र पिंजरा मछली पालन पर

कौशल विकास कार्यक्रम का आयोजन


       एन एफ डी बी कौशल विकास कार्यक्रम के दूसरे चरण में, भा कृ अनु प – केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सी एम एफ आर आइ) के टूटिकोरिन अनुसंधान केंद्र ने टूटिकोरिन जिले के विविध तटीय गाँवों से चुने गए 50 मछुआरों के लिए दिनांक 26 से 28 फरवरी 2019 तक खुला समुद्र पिंजरा मछली पालन एवं समुद्री संवर्धन पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया.

       समारोह में उद्घाटन भाषण देते हुए, श्रीमती एन. चंद्रा, मात्स्यिकी संयुक्त निदेशक (क्षेत्रीय), तमिल नाडु राज्य मात्स्यिकी विभाग ने टूटिकोरिन जिले के मछुआरों के बीच खुला समुद्र पिंजरा मछली पालन एवं समुद्री संवर्धन गतिविधियों को बढ़ावा देने हेतु सी एम एफ आर आइ के टूटिकोरिन अनुसंधान केंद्र द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की. डॉ. पी. पी. मनोजकुमार, प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रभारी वैज्ञानिक, भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ टूटिकोरिन अनुसंधान केंद्र ने सभा का स्वागत किया. यह प्रशिक्षण वाणिज्यिक प्रधान समुद्री मछली एवं कवच मछली के समुद्री पिंजरा पालन तरीका, एकीकृत बहु – पौष्टिक जलकृषि तरीका, समुद्री शैवाल संवर्धन, मोती संवर्धन एवं कम मूल्य मछली खाद्य विकास पर केन्द्रित है. श्रीमती एन. चंद्रा द्वारा प्रशिक्षण नोट (तमिल में) का विमोचन किया गया. इस कार्यक्रम में सिप्पिकुलम और कीलावियापर के मॉडल समुद्री पिंजरा फार्म के क्षेत्रीय दौरे के साथ पिंजरा मछली पालन के लिए स्थान चयन पर व्यावहारिक प्रदर्शन, जी आइ पिंजरा निर्माण, समुद्री बास मछली एवं महाचिंगट का पालन भी शामिल थे. प्रशिक्षणार्थियों को टूटिकोरिन तट के समुद्री शैवाल पालन तरीकों से अवगत कराया गया. समुद्री शैवाल बेड़ा की तैयारी, मोनोलाइन की तैयारी एवं आइ एम टी ए के घटक के रूप में समुद्री शैवालों के रोपण पर व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया.    

     श्री एम. शरवणन, सहायक तकनीकी प्रबंधक, आर जी सी ए, डॉ. पी. रमेश कुमार, वैज्ञानिक, भा कृ अनु प- सी एम एफ आर आइ मंडपम क्षेत्रीय केंद्र एवं श्रीमती उमा कलैशेल्वी, मात्स्यिकी सहायक निदेशक, टूटिकोरिन ने कार्यकर्म में व्याख्यान दिया. 


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