भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद
केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान

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भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ द्वारा पिंजरा मछली पालन के ज़रिए युवकों को उद्यमियां बनाने हेतु प्रशिक्षण

भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ द्वारा पिंजरा मछली पालन के ज़रिए युवकों को उद्यमियां बनाने हेतु प्रशिक्षण


कडमक्कुडी पंचायत के सैकडों परिवारों के लिए लाभदायक प्रयास के रूप में भा कृ अनु प – केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सी एम एफ आर आइ) ने पिंजरा मछली पालन के ज़रिए पंचायत के युवकों को लघु पैमाने के उद्यामी बनने हेतु दिनांक 23 से 25 फरवरी 2019 तक तीन दिवसीय कौशल विकास कार्यक्रम का आयोजन किया.



कोरमपाडम सेवा सहकारी बैंक, कोताड के संयुक्त तत्वाधान में, भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ ने पिंजरा मछली पालन के विविध चरणों जैसे कि पिंजरों की स्थापना, साइट की पहचान, प्रजातियों का चयन, खाद्य प्रबंधन, संग्रहण एवं विपणन पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया. 114 से ज़्यादा ग्रामवासियों ने प्रशिक्षण में भाग लिया जिसमें पिंजरा मछली पालन साइट का मुआइना एवं व्यावहारिक पाठ निहित थे. यह सहयोगी कार्यक्रम भा कृ अनु प - सी एम एफ आर आइ के पिछले वर्ष के चालू परियोजना से जुड़ा हुआ है जो  राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड  (एन एफ डी बी) की वित्तीय सहायता से पिंजरा मछली पालन द्वारा राज्य भर के 5000 मछुआरों को प्रशिक्षित करना लक्ष्य कर रहा है.

पंचायत के पश्च जल में पिंजरा मछली पालन को प्रोत्साहन करने हेतु गाँववालों को भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आर आइ द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन एवं बैंक पिंजरा मछली पालन आरम्भ करने के लिए प्रारम्भिक पूंजी प्रदान करेंगे. सी एम एफ आर आइ मछली पालनकारों को पिंजरा मछली पालन के प्रत्येक चरण में तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करेंगे ताकि वे उस क्षेत्र में उद्यमी बन सके. पिंजरा मछली पालन मछुआरों के लिए एक अतिरिक्त श्रोत की तरह कार्य करेंगे और घरेलू मछली उत्पादन बढाने में सहायता करेंगी. पिंजरा मछली पालन के लिए कोबिया, समुद्री बास, स्नापर, मुल्लेट एवं पर्ल स्पोट जैसी प्रजातियों का उपयोग किया जाएगा.


भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ ने अब तक राज्य भर के 2500 मछुआरों को प्रशिक्षित किया है और सी एम एफ आर आइ के तकनीकी मार्गदर्शन के अधीन करीब 2500 पिंजरा मछली पालन यूनिट तटीय राज्यों में चालू है.



स्फुटनशाला में पालित शीर्षपाद किशोरों का समुद्री रैंचन

स्फुटनशाला में पालित शीर्षपाद किशोरों का समुद्री रैंचन


भारत में प्रतिदिन शीर्षपाद मात्स्यिकी विकसित हो रही है क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय निर्यात बाज़ार में शीर्षपाद संपदाओं जैसे कि स्क्विड एवं कटल फिश की बढ़ती मांग हो रही है. इस समय मौजूदा मात्स्यिकी में पूरक के रूप में नियमित समुद्री रैंचन के दवारा शीर्षपाद प्रभवों की पुनःपूर्ति में सहायक सिद्ध होंगे. शीर्षपाद मात्स्यिकी की निगरानी और इससे जुड़े हुए मछुआरों की राय लेने पर वैज्ञानिकों ने बताया कि आकस्मिक रूप से अंडों का समुच्चय मत्स्यन जाल में फंस जाता है और तट पर पहुंचकर अंड समुच्चय के नाश का कारण बन जाता है. अतः मछुआरों से जीवनक्षम अंडों को एकत्रित करके वायु (गैस) से भरे कंटेनर में सी एम एफ आर आइ के टूटिकोरिन अनुसंधान केंद्र के कवच मछली स्फुटनशाला में भेज दिया जाता है और अंड समुच्चय से किशोरों का पलन करके उचित मत्स्यन परिस्थिति में समुद्री रैन्चन किए जाने का प्रयास किया गया.  

    अंड समुच्चय को एकत्रित करके स्फुटनशाला में वायु भरे एफ आर पी टैंकों में प्रजातिवार अनुरक्षण किया जाता है और इन अंडों के स्फुटन का ध्यानपूर्वक निरीक्षण किया जाता है. स्फुटनशाला में सेपियोट्यूथिस लेस्सोनियाना एवं सेपिया फ़राओनिस के स्फुटन का निरीक्षण किया गया. नई स्फुटित किशोरों को एकत्रित करके पालन टैंकों में संभरित किया जाता है और किशोर शीर्षपादों को जीवित खाद्य जैसे कि माइसिड, यथेष्ट खिलाया जाता है. स्फुटित सेपियोट्यूथिस लेस्सोनियाना एवं सेपिया फ़राओनिस को क्रमशः 30 एवं 40 दिनों तक पालन किया जाता है. स्फुटनशाला में पालन किए गए किशोरों को उचित मत्स्यन क्षेत्र में विमोचन हेतु 10 लिटर वायु भरे गए पोलितीन बैगों में मछुआरों को सौंपा दिया जाता है. वर्ष 2015 से टूटिकोरिन में यह कार्यक्रम जारी किया जा रहा है. 




पाक खाडी में हरित पुली चिंगट का समुद्री रैंचन

पाक खाडी में हरित पुली चिंगट का समुद्री रैंचन


चिंगट प्रभव की पुनःपूर्ति और उसे बढावा देने हेतु समुद्री रैंचन कार्यक्रम को जारी करते हुए और स्थानीय मत्स्यन समुदायों की आजीविका में सहयोग देने के लिए भा कृ अनु प – केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सी एम एफ आर आइ) के मंडपम क्षेत्रीय केंद्र ने पाक खाडी में दिनांक 29 मार्च 2019 को ‘तालै इरल’ नामक स्थानीय नाम से जाने वाले हरित पुली चिंगट (पी. सेमिसल्केटस) के संततियों का विमोचन किया. डॉ. आर. जयकुमार, प्रभारी वैज्ञानिक, डॉ. ए. के. अब्दुल नाज़र, प्रधान वैज्ञानिक, भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ मद्रास अनुसंधान केंद्र, श्री जे. एल. अजित स्टालिन, मात्स्यिकी सहायक निदेशक, राज्य मात्स्यिकी विभाग,  मंडपम के कार्मिक गण, भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ मंडपम क्षेत्रीय केंद्र के वैज्ञानिक एवं कर्मचारी गण, मछुआरा संगठन के नेताओं एवं मछुआरों की उपस्थिति में चिंगट संततियों का विमोचन किया गया. केंद्र के वैज्ञानिक, श्री एम. शंकर एवं डॉ. बी. जोणसन द्वारा समुद्री रैंचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया.  

 



टूटिकोरिन अनुसंधान केंद्र में खुला समुद्र पिंजरा मछली पालन पर कौशल विकास कार्यक्रम का आयोजन

टूटिकोरिन अनुसंधान केंद्र में खुला समुद्र पिंजरा मछली पालन पर

कौशल विकास कार्यक्रम का आयोजन


       एन एफ डी बी कौशल विकास कार्यक्रम के दूसरे चरण में, भा कृ अनु प – केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सी एम एफ आर आइ) के टूटिकोरिन अनुसंधान केंद्र ने टूटिकोरिन जिले के विविध तटीय गाँवों से चुने गए 50 मछुआरों के लिए दिनांक 26 से 28 फरवरी 2019 तक खुला समुद्र पिंजरा मछली पालन एवं समुद्री संवर्धन पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया.

       समारोह में उद्घाटन भाषण देते हुए, श्रीमती एन. चंद्रा, मात्स्यिकी संयुक्त निदेशक (क्षेत्रीय), तमिल नाडु राज्य मात्स्यिकी विभाग ने टूटिकोरिन जिले के मछुआरों के बीच खुला समुद्र पिंजरा मछली पालन एवं समुद्री संवर्धन गतिविधियों को बढ़ावा देने हेतु सी एम एफ आर आइ के टूटिकोरिन अनुसंधान केंद्र द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की. डॉ. पी. पी. मनोजकुमार, प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रभारी वैज्ञानिक, भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ टूटिकोरिन अनुसंधान केंद्र ने सभा का स्वागत किया. यह प्रशिक्षण वाणिज्यिक प्रधान समुद्री मछली एवं कवच मछली के समुद्री पिंजरा पालन तरीका, एकीकृत बहु – पौष्टिक जलकृषि तरीका, समुद्री शैवाल संवर्धन, मोती संवर्धन एवं कम मूल्य मछली खाद्य विकास पर केन्द्रित है. श्रीमती एन. चंद्रा द्वारा प्रशिक्षण नोट (तमिल में) का विमोचन किया गया. इस कार्यक्रम में सिप्पिकुलम और कीलावियापर के मॉडल समुद्री पिंजरा फार्म के क्षेत्रीय दौरे के साथ पिंजरा मछली पालन के लिए स्थान चयन पर व्यावहारिक प्रदर्शन, जी आइ पिंजरा निर्माण, समुद्री बास मछली एवं महाचिंगट का पालन भी शामिल थे. प्रशिक्षणार्थियों को टूटिकोरिन तट के समुद्री शैवाल पालन तरीकों से अवगत कराया गया. समुद्री शैवाल बेड़ा की तैयारी, मोनोलाइन की तैयारी एवं आइ एम टी ए के घटक के रूप में समुद्री शैवालों के रोपण पर व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया.    



     श्री एम. शरवणन, सहायक तकनीकी प्रबंधक, आर जी सी ए, डॉ. पी. रमेश कुमार, वैज्ञानिक, भा कृ अनु प- सी एम एफ आर आइ मंडपम क्षेत्रीय केंद्र एवं श्रीमती उमा कलैशेल्वी, मात्स्यिकी सहायक निदेशक, टूटिकोरिन ने कार्यकर्म में व्याख्यान दिया. 

आर्द्रभूमि के वास्तविक समय की निगरानी के लिए मोबाईल ऐप के विकास हेतु भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ ने आइ एस आर ओ के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया

आर्द्रभूमि के वास्तविक समय की निगरानी के लिए मोबाईल ऐप के विकास हेतु भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ ने आइ एस आर ओ के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया


राज्य भर में छोटी आर्द्रभूमि के परिरक्षण के मुख्य कदम के रूप में, भा कृ अनु प – केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धान संगठन (आइ एस आर ओ) के अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (एस ए सी) के साथ दिनांक 8 अप्रैल 2019 को अहम्मदाबाद के एस ए सी मुख्य कैंपस में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया. समझौता ज्ञापन के अनुसार, देश भर में 5 लाख से अधिक छोटी आर्द्रभूमि के पूर्ण डेटाबेस के साथ एक मोबाइल ऐप और एक केंद्रीकृत पोर्टल को वास्तविक समय की निगरानी और आर्द्रभूमि के संरक्षण के उद्देश्य से विकसित किया जाएगा. यह कदम भा कृ अनु प- सी एम एफ आर आइ के जलवायु लचीला कृषि पर राष्ट्रीय नवोन्मेष (एन आइ सी आर ए) परियोजना के अंतर्गत मात्स्यिकी और आर्द्रभूमि पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के तरीकों को खोजने का एक हिस्सा था. हाल ही में, सी एम एफ आर आइ ने निक्रा परियोजना के तहत मात्स्यिकी और आर्द्रभूमि के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा विकसित किया. श्री नीलेश देशाय, एस ए सी सह निदेशक और डॉ. पी. यु. ज़क्करिया, प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रधान अन्वेषक के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया. भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ की आवश्यकता के अनुसार एस ए सी वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप विकसित करेगा.


          सामान्य राष्ट्रीय पोर्टल और मोबाइल ऐप, समय – समय पर आर्द्र भूमि की  सूचना प्राप्त करने में हितधारकों और जनता की मदद करने के लिए एक सामान्य डिजिटल रिपोसिटरी में आर्द्रभूमि डेटा का  अधिग्रहण और एकीकरण करने के लिए है. आइ एस आर ओ द्वारा पहले ही विकसित भू – स्थानिक आर्द्र्भूमि डेटाबेस को भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ के आर्द्र्भूमि के भौतिक, रासायनिक और जैविक पैरामीटरों के क्षेत्र स्तर इनपुटों द्वारा और भी  मज़बूत किया जाएगा. देश के अवक्रमित आर्द्रभूमि को सुधारने के भाग के रूप में किसानों को टिकाऊ जलकृषि के उपयोग में मदद करने के लिए आवधिक क्षेत्र स्तर के आर्द्रभूमि डेटासेट जैसे कि पानी की गुणवत्ता, तलछट की गुणवत्ता, जैवविविधता एवं प्रजातियों के स्वास्थ्य को उत्पन्न करने में भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ अन्य मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थानों के सहयोग से मुख्य भूमिका निभाएगा.


        यह सहयोगी पहल एक व्यापक आर्द्रभूमि सूचना प्रणाली विकसित करने में मदद करेगी जो वैज्ञानिक समुदायों द्वारा स्थानीय लोगों को ग्रामीण स्तर की आर्द्रभूमि पर सलाह की सुविधा प्रदान कर सकेंगे. उत्पन्न किए गए डेटा को एस ए सी सर्वर में अधिकृत वैज्ञानिक समुदायों तक पहुँच के साथ संग्रहित किया जाएगा और भा कृ अनु प-सी एम एफ आर आइ सहयोगी मात्स्यिकी संस्थानों और हितधारकों द्वारा प्रस्तुत आर्द्रभूमि पर नवीनतम डेटा अपडेट को मंजूरी देने के लिए नोडल केंद्र के रूप में कार्य करेगा.

      यह पहला राष्ट्रीय उदाहरण है कि एक मात्स्यिकी संस्थान आइ एस आर ओ के साथ सहयोग से मात्स्यिकी  और आर्द्रभूमि के लिए एक व्यापक जलवायु अनुकूल ढाँचा विकसित कर रहे हैं। वास्तविक समय में आर्द्रभूमि की सलाह देश में छोटे आर्द्रभूमि के जलवायु लचीलापन को बढ़ा सकती है.


भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ द्वारा समुद्र में मछली उत्पादन बढ़ाने हेतु मछली संततियों का विमोचन

भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ द्वारा समुद्र में मछली उत्पादन बढ़ाने हेतु मछली संततियों का विमोचन


भा कृ अनु प – केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सी एम एफ आर आइ) द्वारा समुद्री उत्पादन बढ़ाने के प्रयास के रूप में दिनांक 7 मार्च 2019 को चिंगट, कटल फिश एवं स्क्विड की   संततियों का विमोचन किया. भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ के मंडपम क्षेत्रीय केंद्र ने विल्लुन्डी तीर्थम, पाक उपसागर में कुल 11 लाख हरित पुलि चिंगटों (पीनस सेमिसल्केटस) की संततियों का विमोचन किया जब कि संस्थान के टूटिकोरिन अनुसंधान केंद्र, टूटिकोरिन द्वारा कटल फिश (सेपिया फ़रोनिस) एवं स्क्विड (सेपियोट्यूतिस लेस्सोनियाना) का समुद्री रैन्चन आयोजित किया गया. भा कृ अनु प- सी एम एफ आर आइ ने नियमित गतिविधि के रूप में समुद्री रैन्चन से प्रजातियों का उत्पादन बढ़ाकर मछुआरों की आजीविका सुनिश्चित करना लक्षित की है. प्राकृतिक स्थानों में प्रभवों के परिरक्षण एवं टिकाऊपन को बनाए रखने में यह सहायक निकलेगा.


        मंडपम क्षेत्रीय केंद्र के समुद्री रैन्चन कार्यक्रम में श्री के. वीर राघव राव, आइ ए एस, रामनाथपुरम के जिलाधीश, मुख्य अतिथि थे. चिंगट संततियों का विमोचन श्री के. मुरलीधरन, संस्थान प्रबंधन समिति के सदस्य, मछुआरा संगठन के नेताओं, डॉ. आर. जयकुमार, प्रभारी वैज्ञानिक, राज्य मात्स्यिकी विभाग के अधिकारियों एवं भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ मंडपम क्षेत्रीय केंद्र के वैज्ञानिकों एवं कार्मिकों की उपस्थिति में किया गया. जब मत्स्यन रोध अवधि के बाद मछुआरे समुद्र में मत्स्यन के लिए जायेंगे तो ये चिंगट उनकी आजीविका को बढ़ाने में सहायक निकलेंगे. वर्ष 2017-18 के दौरान मंडपम केंद्र ने मन्नार खाडी और पाक उपसागर क्षेत्र में 1.7 मिलियन हरित पुलि चिंगट संततियों एवं वर्ष 2018-19 के दौरान कुंतुकल (मन्नार खाडी) और शंगुमल (पाक उपसागर) में 1.4 मिलियन प्रजातियों की संततियों का विमोचन किया गया.

      श्रीमती एन. चंद्रा, मात्स्यिकी संयुक्त निदेशक (क्षेत्रीय), तमिल नाडु राज्य मात्स्यिकी विभाग, टूटिकोरिन सी एम एफ आर आइ टूटिकोरिन अनुसंधान केंद्र के समुद्री रैन्चन कार्यक्रम में उपस्थित थी. टूटिकोरिन के शीर्षपाद प्रभव का उत्पादन बढ़ाना ही इस कार्यक्रम का लक्ष्य था. डॉ. पी. पी. मनोजकुमार, प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रभारी वैज्ञानिक, डॉ. आइ. जगदीश, डॉ. सी. पी. सुजा, प्रधान वैज्ञानिक एवं डॉ. एल. रंजित, श्री डी. लिंग प्रभु, वैज्ञानिक भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे.




भा कृ अनु प – केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान को राजर्षी टंडन पुरस्कार

भा कृ अनु प – केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान को राजर्षी टंडन पुरस्कार

भा कृ अनु प - केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान को वर्ष 2017-18 के दौरान क्षेत्र में स्थित संस्‍थानों में राजभाषा नीति के उत्‍कृष्‍ट निष्पादन के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का राजर्षि टंडन राजभाषा पुरस्‍कार प्राप्‍त हुआ. संसथान को यह पुरस्कार 10 वीं बार प्राप्त हो रहा है. भा कृ अनु प के स्थापना दिवस समारोह के दौरान पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। 

मद्रास अनुसंधान केंद्र में पालन की गयी द्विकपाटियों का संग्रहण मेला

मद्रास अनुसंधान केंद्र में पालन की गयी द्विकपाटियों का संग्रहण मेला


 

   भा कृ अनु प – केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सी एम एफ आर आइ) के मद्रास अनुसंधान केंद्र में दिनांक 26 अप्रैल 2019 को कांचीपुरम जिला के कोट्टैकाडु में पालन की गयी द्विकपाटियों का संग्रहण मेला आयोजित किया गया. श्री ए. इलंगो, संयुक्त निदेशक (मात्स्यिकी), चेन्नई, गाँव के अध्यक्ष, अन्य नेता गण एवं द्विकपाटी पालन में शामिल महिला लाभार्थियों की उपस्थिति में मेला आयोजित किया गया. शुक्तियों एवं शंबुओं का संग्रहण तमिलनाडु मात्स्यिकी विभाग के लिए कार्यान्वित परियोजना मात्स्यिकी प्रबंधन के लिए टिकाऊ आजीविका II: घटक II  द्विकपाटी पालन के भाग के रूप में आयोजित किया गया. वर्ष 2018 के दौरान शुक्तियों एवं शंबुओं का स्टॉक किया गया था.



 

   संग्रहित शुक्तियों एवं शंबुओं को द्विकपाटी पालन में शामिल महिला लाभार्थियों को सौंपा गया. इसके बाद महिला लाभार्थियों के लिए मांस निष्कर्षण, भापन से छिलका उतारना एवं द्विकपाटियों का निर्मलीकरण पर प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण आयोजित किया गया. करीब 30 कि. ग्रा. निर्मलीकृत मांस प्राप्त हुआ और प्रति कि. ग्रा के लिए 200/- रु. की दर पर बेचा गया जिसका लाभ महिला लाभार्थियों को प्रदान किया गया. इस अवसर पर, मात्स्यिकी संयुक्त निदेशक द्वारा द्विकपाटियों के पोषण मूल्य को उजागर करते हुए क्षेत्रीय भाषा (तमिल) में तैयार किए गए ब्रोशर का विमोचन किया गया.  


 

 

समुद्री केंकडों के पालन की प्रौद्योगिकियों पर प्रशिक्षण

समुद्री केंकडों के पालन की प्रौद्योगिकियों पर प्रशिक्षण

भा कृ अनु प – केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सी एम एफ आर आइ) के टूटिकोरिन अनुसंधान केंद्र एवं टूटिकोरिन वन विभाग, के मन्नार तट जीव मंडल ट्रस्ट (जी ओ एम बी आर टी) ने संयुक्त रूप से टूटिकोरिन जिले के जी ओ एम बी आर टी – ई डी सी तटीय गाँव पालयकायल एवं भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ के टूटिकोरिन अनुसंधान केंद्र, टूटिकोरिन में दिनांक 02-04 मई, 2019 के दौरान समुद्री केकडों की पालन प्रौद्योगिकियों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन  किया. 



    तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के सिद्धांत सत्र में समुद्री केकडों का पालन एवं संतति उत्पादन, केकड़ा पालन संवर्धन एवं केकड़ा संवर्धन के लिए पिंजरों का डिजाइन एवं निर्माण, पालन योग्य केकडों के खाद्य निर्माण एवं प्रबंधन अभ्यास एवं पालन योग्य समुद्री केकडों में रोगाणु प्रबंधन एवं समुद्री केकडों को पिंजरे में पालन हेतु स्थान चयन एवं खाद्य निर्माण एवं तैयारी पर व्यावहारिक प्रशिक्षण सम्मिलित थे.

    उदघाटन दिवस पर समुद्री केकड़ों की पालन गतिविधियों में कार्यरत मछुआरों के लिए विशेष रूप से तैयार की गयी प्रशिक्षण नोट का विमोचन किया गया. डॉ. पी. पी. मनोजकुमार, केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक ने सभा का स्वागत किया. डॉ. एल. रंजित, वैज्ञानिक, श्री सी. कालिदास, वैज्ञानिक एवं श्री डी. लिंगप्रभु, वैज्ञानिक ने तकनीकी सत्र का नेतृत्व किया. समापन समारोह में, श्री रघुवरन राजेश, वन रेंज अधिकारी, वन विभाग एवं आंचलिक प्रभारी ने भागीदारों को प्रमाण पत्र प्रदान किए. पालयकायल जी ओ एम बी आर टी – ई डी सी तटीय गाँव से करीब 25 प्रशिक्षणार्थियों ने कार्यक्रम में भाग लिया.

मद्रास अनुसंधान केंद्र में समुद्री मछली अवतरण के आकलन पर प्रशिक्षण कार्यक्रम

मद्रास अनुसंधान केंद्र में समुद्री मछली अवतरण के आकलन पर प्रशिक्षण कार्यक्रम

भा कृ अनु प – केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान में मद्रास अनुसंधान केंद्र में दिनांक 6-10, मई 2019 के दौरान ‘तमिलनाडु के समुद्री मछली अवतरण के आकलन को बढ़ती कणिकता एवं सटीकता सहित सुधारने हेतु विकसित तरीके एवं उपकरण का अनुप्रयोग’ विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. यह प्रशिक्षण कार्यक्रम निधिबद्ध परियोजना मात्स्यिकी प्रबंधन के लिए टिकाऊ आजीविका एवं एफ आइ एम एस यु एल –II, घटक –III,  तमिलनाडु के समुद्री मछली अवतरण का आकलन के भाग के रूप में आयोजित किया गया और इस में मात्स्यिकी विभाग, तमिल नाडु सरकार के अधिकारियों को वर्धित प्रतिचयन पर प्रशिक्षण भी सम्मिलित था.

    डॉ. पी. लक्ष्मीलता, प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रभारी वैज्ञानिक, सी एम एफ आर आइ मद्रास अनुसंधान केंद्र, चेन्नई ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया. उन्होंने सभी भागीदारों को समुद्री मछली अवतरण के आकलन में कौशल बढाने हेतु इस अवसर का सफल रूप से उपयोग करने का अनुरोध किया. डॉ. पी. शिवदास, प्रधान वैज्ञानिक ने भी समान पहलू  को दोहराया और कहा कि भागीदारों को प्रजातियों की पहचान का कौशल बढ़ाना चाहिए, जो समुद्री मछली अवतरण आकलन के लिए पहली आवश्यकता है. श्रीमती. नित्याप्रियदर्शिनी, सहायक निदेशक मात्स्यिकी (सांख्यिकी) ने मात्स्यिकी विभाग के भागीदारों को सलाह दी कि अपने काम में प्रयोग करने हेतु इस प्रकिया को सीखें.