भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद
केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान

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भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ द्वारा भारतीय तारली पर पहला राष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन

भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ द्वारा भारतीय तारली पर पहला राष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन


तारली की उपलब्धतता पर नियमित पूर्वानुमान मॉडल विकसित करने हेतु सहयोगात्मक अनुसंधान के लिए विशेषज्ञों का आह्वान


भा कृ अनु प – केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सी एम एफ आर आइ) ने दिनांक 6 अगस्त  2019 को दक्षिण अरब सागर में तारली की अस्थिरता के कारणों को विश्लेषित करने के लिए भारतीय तारली पर पहला राष्ट्रीय परिसंवाद आयोजित किया गया. जलवायु परिवर्तन, समुद्र विज्ञान, मात्स्यिकी जैविकी, मत्स्य आनुवंशिकी, मत्स्यन प्रौद्योगिकी एवं सामाजिक अर्थशास्त्र में कार्यरत विशेषज्ञों ने सक्रिय रूप से चर्चा में भाग लिया। चर्चा का लक्ष्य दक्षिण–पश्चिम तट पर भारतीय तारली को प्रभावित करने वाले कारकों एवं उससे संबंधित मुद्दों को संबोधित करने के लिए तरीके और साधन ढूँढना था. 


   

   विशेषज्ञों ने नियमित तौर पर भारतीय तारली की प्रचुरता पर दीर्घकालिक अनुमान के लिए पूर्वानुमान मॉडल विकसित करने की सलाह दी. ऐसे मॉडल विकसित करने के लिए विविध संस्थानों की भागीदारी से सहयोगात्मक अनुसंधान पहल का आह्वान किया गया. विशेषज्ञों ने कहा कि तनावपूर्ण पर्यावरणीय अवस्था के दौरान तात्कालिक नियंत्रण की सिफारिश की जाए, जो तारली की प्रचुरता को प्रभावित करता है. उन्होंने कहा कि इस अवधि के दौरान मत्स्यन दबाव से तारली संसाधन में और भी घटती होगी।  

उनके अनुसार पिछले वर्ष से तारली की उपलब्धता में भारी कमी आकलित की गयी है और इस स्थिति में सुधार नहीं हुआ है. विशेषज्ञों ने यह भी प्रस्ताव रखा कि एल निनो वर्ष याने कि तनावपूर्ण अवधि के दौरान न्यूनतम विधिक आकार (एम एल एस) केरल में प्रचलित 10 से. मी. से 15 से. मी. तक बढ़ाना चाहिए. तारली की अस्थिरता पर नियमित पूर्वानुमान के लिए मॉडल तैयार करने की आवश्यकता है. एल निनो, कमज़ोर वृद्धि, प्रजनन की कठिनाई, साधारण मत्स्यन क्षेत्र से प्रवास एवं निरंतर उच्च मत्स्यन  दबाव जैसे प्रतिकूल परिस्थितियों द्वारा तारली की अस्थिरता प्रभावित हुई हैं. अनुसंधानकारों के अनुसार वेलापवर्ती मात्स्यिकी संपदाओं पर पर्यावरणीय प्रभाव एवं जलवायु परिवर्तन से संबंधित अध्ययन के लिए सहयोगात्मक अनुसंधान पहल की आवश्यकता है.  



डॉ. ए. गोपालकृष्णन, निदेशक, भा कृ अनु प, सी एम एफ आर आइ ने कहा कि एल निनो आधिक्य के अनुसार तारली की कमी पर संस्थान द्वारा दिया गया सलाह उसकी अस्थिरता के कारणों को विश्लेषित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम है. भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ द्वारा इस वर्ष के अंत में तारली के जीनोम पर ड्राफ्ट अनुक्रम का विमोचन किया जाएगा. सी एम एफ आर आर आइ ने ओमान तारली सहित सामान आनुवंशिक संरचना से युक्त तीन प्रकार की तारलियों को पाए जाने पर भी, इन तारलिययों के लिए अलग प्रबंधन रणनीतियां आवश्यक हैं.

सी एम एफ आर आइ के वैज्ञानिकों के अतिरिक्त राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान, समुद्री सूचना सेवाओं के लिए भारतीय राष्ट्रीय केंद्र, आइ एस आर ओ के अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र, भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान एवं केन्द्रीय मात्स्यिकी प्रौद्योगिकी संस्थान के अनुसंधानकारों ने चर्चा के दौरान अपने विचार व्यक्त किए.

डॉ. ई. विवेकानंदन, डॉ. प्रतिभा रोहित, डॉ. ई. एम. अब्दुसमद, डॉ. पी.के. दिनेशकुमार, डॉ. निमित कुमार, डॉ. लीला एडविन, डॉ. मिनी रामन एवं डॉ. फसीला एस. पी. ने चर्चा के दौरान भाषण दिए. सी एम एफ आर आइ के वेलापवर्ती मात्स्यिकी प्रभाग द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया.



सी एम एफ आर आइ द्वारा वेंबनाड़ झील में ओप्टिकल मानचित्रण के लिए नागरिक सहभागिता का प्रोत्साहन

सी एम एफ आर आइ द्वारा वेंबनाड़ झील में ओप्टिकल मानचित्रण के लिए नागरिक सहभागिता का प्रोत्साहन

वैज्ञानिक अनुसंधान में नागरिक सहभागिता को प्रोत्साहन करने हेतु केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान द्वारा संस्थानीय अनुसंधान परियोजना के अंतर्गत वेंबनाड़ झील में ओप्टिकल मानचित्रण के लिए दिनांक 5 अगस्त 2019 को आयोजित अभियान में करीब 16 कॉलेजों से 250 छात्रों ने भाग लिया. वेंबनाड़ झील में रोगजनक विब्रियो प्रदूषण के प्रभाव, पारितंत्र में उनके जलाशयों की पहचान, सुदूर संवेदन तकनीकों के ज़रिए विब्रियो वाहकों का मानचित्रण एवं रोगजनक संक्रमण के होटस्पोटों का अनुमान करने हेतु पूर्वानुमान मोडलों का विकास आदि इस अनुसंधान परियोजना का लक्ष्य हैं. सी एम एफ आर आइ, राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संसथान (एन आइ ओ), नानसेन पर्यावरणीय अनुसंधान केंद्र (एन ई आर सी आइ) एवं विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के भारत – यु के पानी गुणता पहल के अंतर्गत प्लैमाउथ समुद्री प्रयोगशाला द्वारा संयुक्त रूप से अध्ययन का आयोजन किया गया.  

   सी एम एफ आर आइ में प्रशिक्षण लेने के बाद, छात्रों ने पानी की आविलता (turbidity) स्तर को मापने के लिए हाथ से उपयोग किए जानेवाले सेषी डिस्क (Secchi disc) के ज़रिए डेटा एकत्रित करना शुरू किया. उनके द्वारा एकत्रित डेटा को मोबाइल ऐप के ज़रिए अपलोड करने का प्रशिक्षण भी दिया गया जो परियोजना के भाग के रूप में विकसित किया गया था. इस अध्ययन का मुख्य लक्ष्य झील में विब्रियो होटस्पोटों का मानचित्रण एवं दूर संवेदन प्रौद्योगिकी के ज़रिए पूर्वानुमान मॉडल को विकसित करना है. एरणाकुलम, आलपुषा, एवं कोट्टयम जिलों के कॉलेजों से छात्र इस कार्यक्रम में आते हैं.

नागरिक सहभागिता पहल की शुरुआत के दौरान डॉ. ए. गोपालकृष्णन, निदेशक, सी एम एफ आर आइ ने कहा कि परियोजना में छात्रों की व्यापक भागीदारी से डेटा संग्रहण की आवृत्ति एवं स्थानिक सीमा को बढाने में सहायता होगी जो वेंबनाड झील के अध्ययन से संबंधित अनुसंधान पहल के लिए मुख्य कारक है. उन्होंने कहा कि छात्रों को उच्च सामाजिक प्रासंगिकता के वैज्ञानिक कार्य का एक हिस्सा होने के अलावा, विज्ञान में अपना कैरियर बनाने का सुनहरा मौका मिलता है. उन्होंने यह भी कहा कि सी एम एफ आर आइ परियोजना के अगले पहलू में विविध हितधारकों जैसे कि मछुआरे, पर्यावरण कार्यकर्ताओं, एन जी ओ एवं झील के तट पर रहनेवाले निवासियों की सहभागिता सुनिश्चित करेंगे.



डॉ. एम. एस. सुनिल, समाज सेवी एवं नारी शक्ति पुरस्कार के विजेता ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया. डॉ. ए. गोपालकृष्णन, निदेशक ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की. डॉ. पी. के. दिनेशकुमार, प्रभारी वैज्ञानिक, एन आइ ओ, कोच्ची क्षेत्रीय केंद्र, डॉ. अजित जोसफ, निदेशक, एन ई आर सी आइ, डॉ. टी. वी. सत्यानंदन, प्रधान वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, एफ आर ए डी एवं डॉ. ग्रिन्सन जोर्ज, वरिष्ठ वैज्ञानिक, सी एम एफ आर आइ ने इस अवसर पर भाषण दिए.



भा कृ अनु प – केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान को राजर्षी टंडन पुरस्कार 2017-18

भा कृ अनु प – केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान को राजर्षी टंडन पुरस्कार

 

     भा कृ अनु प - केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान को वर्ष 2017-18 के दौरान क्षेत्र में स्थित संस्‍थानों में राजभाषा नीति के उत्‍कृष्‍ट निष्पादन के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का राजर्षि टंडन राजभाषा पुरस्‍कार प्राप्‍त हुआ. संसथान को यह पुरस्कार 10 वीं बार प्राप्त हो रहा है. भा कृ अनु प के स्थापना दिवस समारोह के दौरान दिनांक 16 जुलाई, 2019 को एन ए एस सी समुच्चय, नई दिल्ली में आयोजित समारोह में डॉ. ए. गोपालकृष्णन, निदेशक, सी एम एफ आर आइ और श्रीमती ई. के. उमा, मुख्य तकनीकी अधिकारी (हिन्दी) ने डॉ. त्रिलोचन महापात्र, महानिदेशक, भा कृ अनु प से पुरस्कार प्राप्त किया।


 



कारवार में समुद्री पिंजरों में नारंगी चित्ती ग्रूपर का पालन

कारवार में समुद्री पिंजरों में नारंगी चित्ती ग्रूपर का पालन

अखिल भारतीय नेटवर्क परियोजना के अधीन विस्तार गतिविधियों के अंतर्गत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भा कृ अनु प) द्वारा प्रायोजित भा कृ अनु प- केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सी एम एफ आर आइ) के कारवार अनुसंधान केंद्र द्वारा कारवार के बैतकोल में पिंजरों में नारंगी चित्ती ग्रूपर (एपिनिफेलस कोइओइडस) के पालन का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया गया.

  फरवरी 2019 के दौरान बैतकोल के श्री जजी भगत के नेतृत्व में पांच सदस्यों के स्वयं सहायक ग्रुप (एस एच जी) ने दो समुद्री पिंजरे में मछली पालन शुरू किया था. भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ के विशाखपट्टणम क्षेत्रीय केंद्र से प्राप्त ग्रुपरों को नर्सरी में पालन किया था और 20 मछली /  मी 3 घनत्व सहित 4x4x3 मी2 के आकार के जी आइ पिंजरे में प्रदर्शन कार्य के लिए संभरित किया गया. एस एच जी सदस्यों द्वारा कारवार बाज़ार से कम मूल्य वाली मछलियों को खरीदकर जैव भार के 5% की दर पर प्रतिदिन मछलियों को खिलाया गया. भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ द्वारा पिंजरे की नियमित निगरानी की गयी थी. मछलियों का भागिक संग्रहण दिनांक 18.06.2019 को शुरू किया था. पांच महीनों की पालन अवधि के बाद मछलियों का औसत भार 1.05 कि. ग्रा. था (600 से 1.5 कि.ग्रा. तक). अब तक, करीब रु. 600/- कि. ग्रा. औसत बाज़ार मूल्य के 100 कि. ग्रा. मछलियां स्थानीय बाज़ार में बेच गया है. ग्रूपर का अनुमानित कुल उत्पादन 300  कि. ग्रा. सहित अनुमानित अतिजीवितता का स्तर 75% से ज़्यादा है.



भारत के समुद्री मछली उत्पादन में 9% की घटती, तारली की पकड़ में भारी गिरावट

भारत के समुद्री मछली उत्पादन में 9% की घटती, तारली की पकड़ में भारी गिरावट

    वर्ष 2018 के दौरान भारत के समुद्री मछली अवतरण के आकलन के अनुसार भारतीय तटों से तारली की पकड़ में 54% की भारी गिरावट पायी गयी जिसके कारण अवतरण में प्रथम स्थान से नौवां स्थान तक पहुंच गया. वर्ष 2018 में कुल समुद्री मछली उत्पादन 3.49 मिलियन टन आकलित किया गया जो पश्चिम बंगाल, कर्नाटक एवं महाराष्ट्र से क्रमशः 2.01 लाख ट, 0.95 लाख ट, 0.86 लाख ट की कम पकड़ के कारण पिछले वर्ष की तुलना में 3.47 लाख टन (9%)  की घटती पायी गयी. केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सी एम एफ आर आइ) के कोच्ची मुख्यालय द्वारा शुक्रवार को विमोचित डेटा के अनुसार राज्य में सबसे अधिक अवतरण की गयी समुद्री मछली भारतीय बांगडा (2.84 लाख टन) है जिसके बाद शीर्षपाद (2.21 लाख टन), नोन पेनिआइड झींगा (1.94 लाख टन), फीता मीन (1.94 लाख टन), और पेनिआइड झींगा (1.84 लाख टन) हैं. पूरे भारत में तारली की पकड़ वर्ष 2017 के 3.37 लाख टन से 1.55 लाख टन तक गिर गयी. पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और महाराष्ट्र में कम पकड़ पायी गयी. नौ समद्रवर्ती राज्यों में 7.80 लाख टन के साथ गुजरात अवतरण में प्रथम स्थान पर रहा जिसके बाद तमिलनाडु (7.02 लाख टन) और केरल (6.43 लाख टन) हैं. असामान्य रूप से 72,000 टन सहित रेड टूथड ट्रिगर मछली की भारी पकड़ आकलन की अन्य विशेषता है, कर्नाटक में इस प्रजाति का उच्च मात्रा में अवतरण पाया गया।   

केरल में तारली की पकड़ में 39 %  की कमी  

   केरल में, तारली की पकड़ में वर्ष 2017 में 1.27 लाख टन से 77,093 टन तक 39% की कमी पायी गयी. राज्य में पिछले वर्ष की तुलना में तारली को छोड़कर अन्य संपदाओं के कुल अवतरण में 6.42 लाख टन सहित 10% की बढ़ती पायी गयी. भारत में कुल मछली अवतरण की तरह केरल में भी भारतीय बांगडा (80,568 टन) पिछले वर्ष की अपेक्षा अवतरण में 142% की बढ़ती के साथ प्रमुख संपदा रही. राज्य की अन्य प्रमुख प्रजातियां ऐन्चोवी (58,766 टन) सूत्रपख ब्रीम (53,549 टन) पेनीआइड झींगा (50,472 टन) एवं शीर्षपाद (50,180 टन) थी. राज्य के कुल अवतरण में एरणाकुलम जिला ने सबसे ज़्यादा योगदान दिया और मुनम्बम सबसे ज़्यादा योगदान देनेवाला मत्स्यन पोताश्रय रहा.   

मछली के मूल्य में थोड़ी वृद्धि


   वर्ष 2018 में राज्य भर के अवतरण केन्द्रों में मूल्य के आधार पर समुद्री मछली अवतरण का मूल्य 52,632 करोड़ रुपए आकलित किया गया, जो वर्ष 2017 की तुलना में 0.4% अधिक था. अवतरण केंद्र में प्रति कि. ग्रा. मछली का औसत मूल्य