भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद
केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान

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भा कृ अनु प – केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान को राजर्षी टंडन पुरस्कार

भा कृ अनु प – केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान को राजर्षी टंडन पुरस्कार

भा कृ अनु प - केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान को वर्ष 2017-18 के दौरान क्षेत्र में स्थित संस्‍थानों में राजभाषा नीति के उत्‍कृष्‍ट निष्पादन के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का राजर्षि टंडन राजभाषा पुरस्‍कार प्राप्‍त हुआ. संसथान को यह पुरस्कार 10 वीं बार प्राप्त हो रहा है. भा कृ अनु प के स्थापना दिवस समारोह के दौरान पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। 

भा कृ अनु प- सी एम एफ आर आइ द्वारा कृषकों की सहयाता से केरल के बाढ़ प्रभावित गाँव में शंबुओं का भारी संग्रहण

भा कृ अनु प- सी एम एफ आर आइ द्वारा कृषकों की सहयाता से केरल के बाढ़ प्रभावित गाँव में शंबुओं का भारी संग्रहण

    मूत्तकुन्नम के कृषक, पिछले वर्ष अगस्त में केरल के सबसे अधिक बाढ़ से प्रभावित गाँव के किसानों ने भा कृ अनु प – केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सी एम एफ आर आइ), कोच्ची के मार्गदर्शन से अपने जीवन का पुनःनिर्माण कार्य शुरू किया है. कृषकों में, ज्यादात्तर केरल के एरणाकुलम जिले के गाँव की महिलाओं ने, भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ के वैज्ञानिक मार्गदर्शन से शंबुओं का भारी संग्रहण किया. प्रदेश के पांच स्वयं सहायक ग्रुपों के पांच पालन यूनिटों से कुल 6.5 टन शंबुओं की उपज प्राप्त की. कृषकों ने जनवरी में पांच मीटर की लंबाई और चौडाई के आकार वाले बाँस के ढाँचे का उपयोग करके पालन शुरू किया.



   द्विकपाटी पालन को अतिरिक्त आजीविका के रूप में अपनाते हुए कृषकों ने, पिछले वर्ष अगस्त में हुई बाढ़ से हुए काफी नुकसान और शंबु पालन यूनिटों के नाश को बराबर कर दिया. उनकी यह चिंता थी कि बाढ़ के बाद जलीय पारितंत्र में हुए बदलाव से शंबु पालन प्रभावित हो जाएगा. परन्तु इस बार अच्छे संग्रहण से कृषकों को राहत एवं अपनी हानि को लाभ बनाने की प्रत्याशा है.

   भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ के मोलस्कन मात्स्यिकी प्रभाग के मार्गदर्शन से पांच महीनों तक पालन किया गया. संग्रहण के बाद, शुद्धीकरण नामक वैज्ञानिक प्रक्रिया जो भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ द्वारा विकसित किया गया है, द्वारा उपभोग से पहले शुद्धीकृत समुद्र जल प्रदान करके शंबु के क्लोम और आंत से दूषित पदार्थों को निकाला जाता है




खाद्य देने की आवश्यकता नहीं होने के कारण मछली पालन की तुलना में द्विकपाटी पालन कम खर्चीला है. पालन यूनिटों की स्थापना के लिए प्रारंभिक पूंजी ही पालन के लिए मुख्य व्यय है.

शंबु प्रोटीन, लिपिड, कार्बोहाइड्रेट, खनिज (कैलशियम, लोहा, कोप्पर. जिंक एवं फोस्फरस) एवं विटामीनों से संपुष्ट हैं.
 

डॉ. त्रिलोचन महापात्र द्वारा अतिरक्तदाब कम करने के लिए भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ के न्यूट्रास्यूटिकल उत्पाद का विमोचन

डॉ. त्रिलोचन महापात्र द्वारा अतिरक्तदाब कम करने के लिए भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ के न्यूट्रास्यूटिकल उत्पाद का विमोचन


डॉ. त्रिलोचन महापात्र, सचिव, डेयर एवं महा निदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भा कृ अनु प) ने डॉ. जे. के. जेना, उप महानिदेशक की उपस्थिति में दिनांक 25 मई 2019 को अतिरक्तदाब के लिए प्राकृतिक औषधि के रूप में भा कृ अनु प – केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसन्धान संस्थान द्वारा विकसित न्यूट्रास्यूटिकल उत्पाद, कडलमीनTM ऐंटी हाइपरटेंसीव एक्ट्रेक्ट (CadalminTM AHe) का विमोचन किया.



    कडलमीनTM AHe समुद्री शैवालों से विकसित किया गया है, जो मुख्यतः भारतीय तटीय जल में उपलब्ध है. समुद्री शैवाल समुद्र का प्राकृतिक उपहार है जो अपने विशिष्ट औषधीय गुण के लिए जाना जाता है. समुद्री शैवालों से जैवसक्रिय फारमाकोफोर को विकसित करके बने न्यूट्रास्यूटिकल उत्पाद, स्ट्रोक, ह्रदय आघात, ह्रदय पात, धमनी एन्यूरिज़म एवं क्रोनिक वृक्क की विफलता (chronic Kidney failure) के लिए संकट कारक अतिरक्तदाब को नियंत्रित करने के लिए मौखिक रूप से उपयोग किया जा सकता है. कडलमीनTM ऐंटी हाइपरटेंसीव एक्ट्रेक्ट में पेटंट प्रौद्योगिकी द्वारा चयनित समुद्री शैवालों से ली गयी 100% प्राकृतिक समुद्री जैवसक्रिय सामग्रियां निहित हैं और यह 400 मि. ग्रा. की कैपस्यूलों में उपलब्ध कराया जाएगा. विस्तृत नैदानिक परीक्षणों द्वारा यह स्थापित किया गया कि न्यूट्रास्यूटिकल का कोई पार्श्व प्रभाव नहीं है. 100% प्राकृतिक समुद्री जैवसक्रिय सामग्रियों द्वारा समुद्री शैवालों से बना कडलमीनTM अतिरक्तदाब कम करने का प्राकृतिक उपाय है.



  यह भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ द्वारा विकसित न्यूट्रास्यूटिकल उत्पादों की श्रेणी में छठा है. पहले संस्थान द्वारा दो ऐंटी आर्थरैटिक, एक ऐंटी डाइबेटिक, ऐंटी डिसलिपिडेमिक एवं ऐंटी इपोथाइरोइड न्यूट्रास्यूटिकल विकसित किए गए थे. औषध निर्माण कंपनियों द्वारा इन प्रौद्योगिकियों का वाणिज्यीकरण किया गया है.



    भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ के वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों का संबोधन करते हुए, महा निदेशक ने कहा कि प्रौद्योगिकी एवं ज्ञान प्रणाली का विकास प्रकृति के अनुकूल तरीकों से होना चाहिए. प्रौद्योगिकी एवं नवोन्मेष में भारी परिवर्तन के ज़रिए ऊंची छलांग लगायी जा सकती है जो राष्ट्रीय एवं वैश्विक पहुंच में व्यापक दृश्यता प्रदान करेगी.   

    डॉ. महापात्र ने युवा वैज्ञानिकों से अपने क्षेत्र में नए विचारों द्वारा रचनात्मक परिवर्तन लाने के लिए आगे आने का आग्रह किया. युवा वैज्ञानिकों से ही भविष्य का नेतृत्व होना चाहिए. परिवर्तन अनिवार्य है और युवकों को मौजूदा प्रौद्योगिकियों में नवीनता लाने के लिए ध्यान देना चाहिए. मात्स्यिकी क्षेत्र की प्रधानता को व्यक्त करते हुए महा निदेशक ने कहा कि भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ नीली क्रान्ति के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है.



   उन्होंने भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ के वैज्ञानिकों द्वारा लिखी गयी ‘रहस्यपूर्ण भारतीय तारली : एक अंतर्दृष्टि’ नामक पुस्तक एवं लक्षद्वीप के प्रमुख खाद्य एवं अलंकारी मछलियों पर बनाए गए पोस्टरों का विमोचन किया. डॉ. जे.के.जेना, सहायक महा निदेशक (मात्स्यिकी), भा कृ अनु प ने समारोह की अध्यक्षता की. डॉ. ए. गोपालकृष्णन, निदेशक, भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ ने सभा का स्वागत किया और डॉ. टी. वी. सत्यानंदन, अध्यक्ष, मात्स्यिकी संपदा निर्धारण प्रभाग, भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ ने धन्यवाद ज्ञापित किया.

मद्रास अनुसंधान केंद्र में समुद्री मछली अवतरण के आकलन पर प्रशिक्षण कार्यक्रम

मद्रास अनुसंधान केंद्र में समुद्री मछली अवतरण के आकलन पर प्रशिक्षण कार्यक्रम

भा कृ अनु प – केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान में मद्रास अनुसंधान केंद्र में दिनांक 6-10, मई 2019 के दौरान ‘तमिलनाडु के समुद्री मछली अवतरण के आकलन को बढ़ती कणिकता एवं सटीकता सहित सुधारने हेतु विकसित तरीके एवं उपकरण का अनुप्रयोग’ विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. यह प्रशिक्षण कार्यक्रम निधिबद्ध परियोजना मात्स्यिकी प्रबंधन के लिए टिकाऊ आजीविका एवं एफ आइ एम एस यु एल –II, घटक –III,  तमिलनाडु के समुद्री मछली अवतरण का आकलन के भाग के रूप में आयोजित किया गया और इस में मात्स्यिकी विभाग, तमिल नाडु सरकार के अधिकारियों को वर्धित प्रतिचयन पर प्रशिक्षण भी सम्मिलित था.

    डॉ. पी. लक्ष्मीलता, प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रभारी वैज्ञानिक, सी एम एफ आर आइ मद्रास अनुसंधान केंद्र, चेन्नई ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया. उन्होंने सभी भागीदारों को समुद्री मछली अवतरण के आकलन में कौशल बढाने हेतु इस अवसर का सफल रूप से उपयोग करने का अनुरोध किया. डॉ. पी. शिवदास, प्रधान वैज्ञानिक ने भी समान पहलू  को दोहराया और कहा कि भागीदारों को प्रजातियों की पहचान का कौशल बढ़ाना चाहिए, जो समुद्री मछली अवतरण आकलन के लिए पहली आवश्यकता है. श्रीमती. नित्याप्रियदर्शिनी, सहायक निदेशक मात्स्यिकी (सांख्यिकी) ने मात्स्यिकी विभाग के भागीदारों को सलाह दी कि अपने काम में प्रयोग करने हेतु इस प्रकिया को सीखें. 


     प्रशिक्षण में प्रदर्शिनी कार्यप्रणाली, एनमीन ऐप का सॉफ्टवेयर अनुप्रयोग, विश्लेषण एवं आकलन, आकलन प्रक्रिया पर व्यावहारिक प्रशिक्षण, विविध संपदाओं (मोलस्कन, तलमज्जी, वेलापवर्ती एवं क्रस्टेशियन) की पहचान के लिए युक्तियां निहित थीं.  डॉ. जे. जयशंकर, प्रधान वैज्ञानिक, एफ आर ए डी, कोच्ची एवं एफ आइ एम एस यु एल –II, घटक –III का नोडल अधिकारी, डॉ. एम. शिवदास, प्रधान वैज्ञानिक, डॉ. पी. टी. शारदा, प्रधान वैज्ञानिक, डॉ. शोभा जो किषकूडन, प्रधान वैज्ञानिक, डॉ. ई. एम. चंदप्रज्ञादर्शिनी, वैज्ञानिक, श्री डी. पुगषेंदी, सहायक मुख्य तकनीकी अधिकारी, श्री वी. जोसफ सेवियर, वरिष्ठ तकनीशियन, श्री एन. रूद्रमूर्ती, वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी ने सत्रों का संचालन किया.


     भागीदारों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने की संतुष्टि प्रकट की और संकाय द्वारा एनमीन ऐप का अनुप्रयोग, प्रदर्शिनी कार्यप्रणाली एवं प्रजातियों की पहचान को समझाने में उठाए गए प्रयासों की सराहना की. डॉ. जे. जयशंकर, प्रधान वैज्ञानिक, नोडल अधिकारी ने कहा कि इस प्रशिक्षण का प्रयोग किया जाना चाहिए और अपने संदेह को दूर करने के लिए निरंतर एवं व्यवस्थित रूप में सी एम एफ आर आइ मद्रास अनुसंधान केंद्र, चेन्नई से संपर्क करना चाहिए. डॉ. पी. लक्ष्मीलता ने सभी भागीदारों, कार्यक्रम सफल बनाने के लिए सहयोग दिए गए सी एम एफ आर आइ के वैज्ञानिकों, तकनीकी, प्रशासनिक एवं सपोर्ट स्टाफ कर्मचारियों को धन्यवाद अदा किया.   

समुद्री केंकडों के पालन की प्रौद्योगिकियों पर प्रशिक्षण

समुद्री केंकडों के पालन की प्रौद्योगिकियों पर प्रशिक्षण

भा कृ अनु प – केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सी एम एफ आर आइ) के टूटिकोरिन अनुसंधान केंद्र एवं टूटिकोरिन वन विभाग, के मन्नार तट जीव मंडल ट्रस्ट (जी ओ एम बी आर टी) ने संयुक्त रूप से टूटिकोरिन जिले के जी ओ एम बी आर टी – ई डी सी तटीय गाँव पालयकायल एवं भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ के टूटिकोरिन अनुसंधान केंद्र, टूटिकोरिन में दिनांक 02-04 मई, 2019 के दौरान समुद्री केकडों की पालन प्रौद्योगिकियों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन  किया. 



    तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के सिद्धांत सत्र में समुद्री केकडों का पालन एवं संतति उत्पादन, केकड़ा पालन संवर्धन एवं केकड़ा संवर्धन के लिए पिंजरों का डिजाइन एवं निर्माण, पालन योग्य केकडों के खाद्य निर्माण एवं प्रबंधन अभ्यास एवं पालन योग्य समुद्री केकडों में रोगाणु प्रबंधन एवं समुद्री केकडों को पिंजरे में पालन हेतु स्थान चयन एवं खाद्य निर्माण एवं तैयारी पर व्यावहारिक प्रशिक्षण सम्मिलित थे.

    उदघाटन दिवस पर समुद्री केकड़ों की पालन गतिविधियों में कार्यरत मछुआरों के लिए विशेष रूप से तैयार की गयी प्रशिक्षण नोट का विमोचन किया गया. डॉ. पी. पी. मनोजकुमार, केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक ने सभा का स्वागत किया. डॉ. एल. रंजित, वैज्ञानिक, श्री सी. कालिदास, वैज्ञानिक एवं श्री डी. लिंगप्रभु, वैज्ञानिक ने तकनीकी सत्र का नेतृत्व किया. समापन समारोह में, श्री रघुवरन राजेश, वन रेंज अधिकारी, वन विभाग एवं आंचलिक प्रभारी ने भागीदारों को प्रमाण पत्र प्रदान किए. पालयकायल जी ओ एम बी आर टी – ई डी सी तटीय गाँव से करीब 25 प्रशिक्षणार्थियों ने कार्यक्रम में भाग लिया.

मद्रास अनुसंधान केंद्र में पालन की गयी द्विकपाटियों का संग्रहण मेला

मद्रास अनुसंधान केंद्र में पालन की गयी द्विकपाटियों का संग्रहण मेला


 

   भा कृ अनु प – केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सी एम एफ आर आइ) के मद्रास अनुसंधान केंद्र में दिनांक 26 अप्रैल 2019 को कांचीपुरम जिला के कोट्टैकाडु में पालन की गयी द्विकपाटियों का संग्रहण मेला आयोजित किया गया. श्री ए. इलंगो, संयुक्त निदेशक (मात्स्यिकी), चेन्नई, गाँव के अध्यक्ष, अन्य नेता गण एवं द्विकपाटी पालन में शामिल महिला लाभार्थियों की उपस्थिति में मेला आयोजित किया गया. शुक्तियों एवं शंबुओं का संग्रहण तमिलनाडु मात्स्यिकी विभाग के लिए कार्यान्वित परियोजना मात्स्यिकी प्रबंधन के लिए टिकाऊ आजीविका II: घटक II  द्विकपाटी पालन के भाग के रूप में आयोजित किया गया. वर्ष 2018 के दौरान शुक्तियों एवं शंबुओं का स्टॉक किया गया था.



 

   संग्रहित शुक्तियों एवं शंबुओं को द्विकपाटी पालन में शामिल महिला लाभार्थियों को सौंपा गया. इसके बाद महिला लाभार्थियों के लिए मांस निष्कर्षण, भापन से छिलका उतारना एवं द्विकपाटियों का निर्मलीकरण पर प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण आयोजित किया गया. करीब 30 कि. ग्रा. निर्मलीकृत मांस प्राप्त हुआ और प्रति कि. ग्रा के लिए 200/- रु. की दर पर बेचा गया जिसका लाभ महिला लाभार्थियों को प्रदान किया गया. इस अवसर पर, मात्स्यिकी संयुक्त निदेशक द्वारा द्विकपाटियों के पोषण मूल्य को उजागर करते हुए क्षेत्रीय भाषा (तमिल) में तैयार किए गए ब्रोशर का विमोचन किया गया.  


 

 

भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ द्वारा समुद्र में मछली उत्पादन बढ़ाने हेतु मछली संततियों का विमोचन

भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ द्वारा समुद्र में मछली उत्पादन बढ़ाने हेतु मछली संततियों का विमोचन


भा कृ अनु प – केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सी एम एफ आर आइ) द्वारा समुद्री उत्पादन बढ़ाने के प्रयास के रूप में दिनांक 7 मार्च 2019 को चिंगट, कटल फिश एवं स्क्विड की   संततियों का विमोचन किया. भा कृ अनु प – सी एम एफ आर आइ के मंडपम क्षेत्रीय केंद्र ने विल्लुन्डी तीर्थम, पाक उपसागर में कुल 11 लाख हरित पुलि चिंगटों (पीनस सेमिसल्केटस) की संततियों का विमोचन किया जब कि संस्थान के टूटिकोरिन अनुसंधान केंद्र, टूटिकोरिन द्वारा कटल फिश (सेपिया फ़रोनिस) एवं स्क्विड (सेपियोट्यूतिस लेस्सोनियाना) का समुद्री रैन्चन आयोजित किया गया. भा कृ अनु प- सी एम एफ आर आइ ने नियमित गतिविधि के रूप में समुद्री रैन्चन से प्रजातियों का उत्पादन बढ़ाकर मछुआरों की आजीविका सुनिश्चित करना लक्षित की है. प्राकृतिक स्थानों में प्रभवों के परिरक्षण एवं टिकाऊपन को बनाए रखने में यह सहायक निकलेगा.